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भारतीय नागरिक:भारत-चीन संबंध के स्वस्थ स्थिर विकास की प्रतीक्षा

2019-10-13 19:05:00

देशों के बीच आदान-प्रदान जनता के बीच घनिष्ठता पर आधारित है, जनता के बीच घनिष्ठता लोगों के मन में संपर्क पर आधारित है। जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय के चीन और दक्षिण पूर्व एशिया अनुसंधान केंद्र के प्रोफेसर प्रियदर्शी मुखर्जी ने कहा कि वे चीनी संस्कृति को बहुत पसंद करते हैं। बहुत पहले से ही उन्होंने चीनी भाषा सीखना शुरु किया। साल 2014 में राष्ट्रपति शी चिनफिंग की भारत यात्रा के दौरान उन्होंने चीनी से राष्ट्रपति शी के साथ बातचीत की। इसे याद करते हुए प्रियदर्शी मुखर्जी ने कहा:“साल 2014 में नई दिल्ली स्थित राष्ट्रपति भवन में लगातार दो दिनों में मैं दो बार राष्ट्रपति शी चिनफिंग और उनकी पत्नी फंग लियुआन से मिला। दूसरे दिन राष्ट्रपति शी ने मुझसे कहा कि कल मैंने आपको देखा था, आपकी चीनी भाषा बहुत अच्छी है। वे मुझे याद है। यह बहुत जादुई बात है।”

चीन के आर्थिक विकास से चीन और भारत के बीच आर्थिक व्यापारिक आवाजाही को आगे बढ़ाया जाता है। लम्बे समय से चीन लगातार भारत के पहला बड़ा व्यापारिक साझेदार रहा है, जबकि भारत दक्षिण एशिया में चीन का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। भारतीय निर्यात संगठन संघ (एफ़आईईओ) के महानिदेशक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉक्टर अजय सहाय ने चाइना मीडिया ग्रुप (सीएमजी) के संवाददाता को दिए एक इन्टरव्यू में आशा जतायी कि मौजूदा महामुलाकात से ज्यादा से ज्यादा चीनी निगम निवेश और सहयोग के लिए भारत आएँगे, इसके साथ ही दोनों देशों के विभिन्न जगतों के बीच आदान-प्रदान और आवाजाही मजबूत होंगी। उन्होंने कहा:“भारत और चीन के बीच संबंध मित्रवत है। यह मैत्रिपूर्ण संबंध न केवल आर्थिक क्षेत्र में सीमित नहीं है। हमारे बीच गहरा सांस्कृतिक संबंध कायम है। आजकल ज्यादा से ज्यादा भारतीय पर्यटक चीन दौरे पर जाते हैं। इसके साथ ही अधिक से अधिक चीनी दोस्त निवेश और पर्यटन के लिए भारत आते हैं। हमारी संस्था चीन पर बहुत विश्वास करती है। हम चीन के क्वांगचो आयात निर्यात एक्सपो, खुनमिंग आयात निर्यात एक्सपो, शांगहाई में अंतरराष्ट्रीय आयात एक्सपो और छंगतु एक्सपो आदि एक्सपो में भाग लेते हैं। भारतीय निर्यात व्यापारियों के लिए चीन एक बहुत बड़ा बाज़ार है।”