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अच्छे छात्रों से पढ़ने का आग्रह करने की ज़रूरत नहीं

2019-09-06 13:46:00

युवावस्था मानव की जिन्दगी में एक बहुत महत्वपूर्ण समय होता है। इस दौरान बच्चों को अच्छी आदतें सिखानी चाहिये। बेशक, यह असंभव है कि हर छात्र को बचपन से ही सीखने का बड़ा शौक होता है। इसलिये माता-पिता को बच्चों को अपनी इच्छा से सीखने की अच्छी आदत डलवानी चाहिये। तो यह आदत कैसे विकसित हो सकती है ?

पहले, बच्चों को दूसरे लोगों की मदद के बारे में ठीक से समझना चाहिये। कभी कभार कुछ छात्र यह शिकायत करते हैं कि उनकी पढ़ाई अच्छी नहीं चल रही, इसकी वजह उनके टीचर या मां-बाप हैं। क्योंकि उन्होंने मदद नहीं दी। या उनके लिए पर्सनल टीचर की व्यवस्था नहीं की। वास्तव में अगर हम ध्यान से देखें, तो पढ़ाई में ज्यादा अच्छे विद्यार्थियों को दूसरे लोगों की प्रत्यक्ष मदद बहुत कम चाहिए होती है। उन्हें अपने आप पढ़ाई करना पसंद होता है। दूसरे की मदद उन्हें केवल कुछ सूचना हासिल करने और उनकी नज़र को विस्तृत करने में भूमिका निभाती हैं।

उदाहरण के लिये जब विश्व प्रसिद्ध वैज्ञानिक आइंस्टीन ने आरंभिक रूप से प्राकृतिक विज्ञान में प्रवेश किया, तो एक व्यक्ति ने उन पर महत्वपूर्ण प्रभाव डाला। वे थे रूसी छात्र तालमेय। उन्होंने प्राकृतिक विज्ञान के गेट की पहली चाबी आइंस्टीन को दी। यह चाबी पवित्र जीआमिट्री नामक एक पुस्तिका थी। इस पुस्तिका की यादें हमेशा आइंस्टीन के दिमाग में ताज़ा रही। सबसे पहले तालमेय ने अकसर आइंस्टीन के साथ गणित के विषय पर चर्चा की। बातचीत करते करते गणित के प्रति आइंस्टीन का शौक धीरे धीरे बढ़ता गया। स्कूल में पढ़ाने के कुंठित तरीके को छोड़कर आइंस्टीन ने अपने आप से कैल्क्युलस सीखना शुरू किया। कुछ समय के बाद हालांकि गणित में तालमेय आइंस्टीन से पीछे हो गये, लेकिन वे पहले की तरह उत्साह के साथ आइंस्टीन को उसी समय प्रचलित प्राकृतिक विज्ञान की तरह तरह पुस्तकों व दर्शन पुस्तकों का परिचय देते थे।