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पठारीय शहर शिनिंग

2019-08-28 09:07:00

मठ के पिछले भाग में एक छोटे आँगन स्थित है। इस आँगन के मकान हान व तिब्बती जाति की वास्तुशैलियों वाले हैं। मकानों की छत पर लगे हरे पत्थर और गोल छज्जे हान शैली के हैं, जबकि लाल सीढ़ीनुमा खंभे, दीवारें और खिड़कियां तिब्बती शैली की। दिलोजान से दंडवत होने में मग्न अनुयाइयों को देखते हुए पर्यटकों को उन की बुद्ध के प्रति अपार निष्ठा महसूस हुई। शायद उन्हें विश्वास हुआ होगा कि उन के हृद्य में अवश्य ही एक छायादार पीपल है और हर पीपल पत्ती पर एक बुद्ध की मूर्ति अंकित है और ये मूर्तियां अपना मानसिक आस्था और जीवन लक्ष्य ही है। इसी लक्ष्य को पूरा करने के लिए वे कठिनाइयों को दूर कर अकल्पनीय दृढता से स्वयं निर्धारित कार्य पूरा करने के लिए प्रयास करते रहते हैं।

ताल्स मठ चीन के प्रसिद्ध बौद्ध धर्म का पवित्र स्थल है। हजारों लाखों निष्ठावान अनुयायी दूर फासले की परवाह न कर यहां आते हैं दंडवत प्रार्थना के जरिए अपने और भगवान के बीच का फासला नाप लेते हैं और आशीर्वाद मांगते हैं।

यहां पर लोगों ने सच्चे मायने में बौद्ध धर्म की संस्कृति का तर्क समझ लिया है और दूसरे अलग क्षेत्र के विविधतापूर्ण रीति रिवाज को महसूस किया है। इतने अधिक निष्ठावान अनुयायी और शांत वातावरण किसी दूसरी जगह में कहीं नजर नहीं आते हैं।

थाल्स यानी पगोडा मठ के दौरे से पर्यटकों को बौद्ध धर्म का यह तर्क समझ में आया कि किसी भी एक क्षण दिल में एक साधारण भाव बनाये रखकर उसमें बसे पीपल की रक्षा की जानी चाहिए।